Chapter 65: The Argument
सुबह 8 बजे। Hospital।
Lockdown अभी भी था। बाहर police थी। अंदर... अंदर Room 0 था।
Aarav ने phone किया। Father को।
"पापा?"
"बेटा? तुम कहाँ हो? Hospital में? वहाँ मत जाओ! वहाँ... वहाँ कुछ गड़बड़ है!"
"पापा, मुझे... मुझे एक काम चाहिए।"
"क्या?"
"Naina की diary। असली diary।"
Father चुप हो गए।
"पापा?"
"बेटा... वो... वो diary..."
"पापा, मुझे चाहिए। अभी।"
"क्यों?"
"क्योंकि... क्योंकि Naina ने... Naina ने कुछ लिखा होगा। जो... जो हमें मदद कर सकता है।"
"बेटा, वो diary... वो dangerous है।"
"पापा, सब कुछ dangerous है। Room 0... Room 0 खुला है। हर कोई देख रहा है। और... हमें... हमें seal करना होगा।"
"Seal? कैसे?"
"पापा, बस... diary भेज दो। अभी।"
Father ने गहरी साँस ली।
"ठीक है। लेकिन... बेटा... संभल के।"
"हाँ पापा। शुक्रिया।"
Phone रखा।
30 मिनट बाद — delivery boy ने packet दिया।
Aarav ने packet खोला। अंदर — एक diary। पुरानी। Naina की।
"ये... ये Naina की diary है?"
"हाँ।"
"और... इसमें क्या है?"
"पता नहीं। मैंने... मैंने कभी नहीं पढ़ी।"
"क्यों नहीं पढ़ी?"
"क्योंकि... क्योंकि मैं... मैं डरता था। कि... कि इसमें कुछ ऐसा होगा जो... जो मैं नहीं सह पाऊँगा।"
Aarav ने diary खोली।
पहले page पर — Naina की handwriting।
"Dear Diary,
आज मैंने Room 0 देखा। पहली बार। बहुत डर लगा। लेकिन... अंदर कुछ था। कुछ... जो मुझे बुला रहा था।
मैं... मैं अंदर गई।
और... मैंने उसे देखा।
बेड पर। बीमार। मर रहा था।
और... उसका चेहरा... भैया का था।
मैं चिल्लाई। भैया! भैया!
लेकिन... वो... वो सुन नहीं रहा था।
मैंने... मैंने उसे छुआ।
और... Room 0 ने... Room 0 ने मुझे रोक लिया।
'तुम इसे नहीं बचा सकतीं,' उसने कहा।
'क्यों नहीं?'
'क्योंकि... ये... ये तुम्हारा भाई नहीं है।'
'क्या मतलब?'
'ये... ये replacement है। असली Aarav मर गया था। बचपन में। Room 0 ने इसे replace किया।'
'नहीं! ये... ये झूठ है!'
'सच है। तुम्हारा भाई... तुम्हारा भाई कभी था ही नहीं।'
मैं... मैं टूट गई।
भैया... भैया replacement था?
नहीं। नहीं। ये... ये झूठ है।
लेकिन... Room 0... Room 0 झूठ नहीं बोलता।
मैंने... मैंने भैया को देखा। बेड पर। बीमार।
और... मैंने decide किया।
मैं... मैं भैया को बचाऊँगी।
Room 0 ने कहा — 'अगर तुमने इसे बचाया... तो तुम मर जाओगी।'
'तो... तो मैं मर जाऊँगी।'
'क्यों?'
'क्योंकि... भैया... भैया मेरे लिए सब कुछ है।'
'लेकिन... ये तुम्हारा असली भाई नहीं है।'
'मुझे पता है। लेकिन... मुझे... मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। ये... ये मेरा भाई है। मैं... मैं इसे बचाऊँगी।'
Room 0 ने... Room 0 ने मुझे जाने दिया।
मैं... मैंने भैया का हाथ पकड़ा।
और... Room 0 ने... Room 0 ने मुझे खींच लिया।
मैं... मैं मर गई।
लेकिन... लेकिन भैया... भैया बच गया।
Room 0 ने... Room 0 ने भैया को replace किया। नया। ताज़ा।
और... भैया... भैया को पता भी नहीं चला।
भैया... भैया ज़िंदा है। और... मैं... मैं गई।
लेकिन... लेकिन मैं... मैं खुश हूँ।
क्योंकि... भैया... भैया बच गया।
अगर... अगर कभी भैया को पता चले... कि... कि वो replacement है... तो... तो उसे... उसे मेरी याद आएगी।
और... शायद... शायद वो... वो Room 0 को seal कर दे।
शायद।
लेकिन... लेकिन मैं नहीं चाहती कि भैया seal करे।
क्योंकि... seal करने वाला... वो गायब हो जाता है।
और... भैया... भैया मेरे लिए सब कुछ है।
मैं... मैं नहीं चाहती कि भैया गायब हो।
लेकिन... लेकिन अगर भैया ने decide किया... तो... तो मैं... मैं कुछ नहीं कर सकती।
क्योंकि... क्योंकि मैं... मैं गई।
मैं... मैं सिर्फ एक नाम हूँ। एक diary। एक याद।
और... शायद... शायद ये भी गायब हो जाएगा।
Naina।"
Aarav ने diary बंद की।
उसकी आँखों में आँसू थे। लेकिन... वो रो नहीं रहा था।
वो चुप था। बिल्कुल चुप।
"Meera..."
"हम्म?"
"मैं... मैंने पढ़ लिया।"
"क्या लिखा है?"
"Naina... Naina ने... उसने... मुझे बचाने के लिए... खुद को बलिदान किया।"
"हाँ। मैं जानती हूँ।"
"और... अब... अब मैं... मैं भी वही करूँगा।"
"नहीं।"
"Meera... Naina ने... उसने मेरे लिए मरी। और... मैं... मैं उसकी याद... उसकी याद के लिए... Room 0 seal करूँगा।"
"नहीं।"
"क्यों नहीं?"
"क्योंकि... Naina ने... उसने तुम्हारे लिए मरी। और... तुम... तुम भी वही करोगे? तो... तो Naina की मौत... बेकार थी?"
"नहीं। Naina की मौत... बेकार नहीं थी। उसने... उसने मुझे बचाया।"
"हाँ। और... अब तुम... तुम भी वही करोगे? तुम भी किसी के लिए मरोगे?"
"हाँ।"
"किसके लिए?"
"तुम्हारे लिए।"
Meera चुप हो गई।
"Meera... तुम... तुम ज़िंदा रहो। मैं... मैं Room 0 seal करूँगा। और... तुम... तुम ज़िंदा रहोगी।"
"नहीं।"
"क्यों नहीं?"
"क्योंकि... मैं... मैं तुम्हें जाने नहीं दूँगी।"
"Meera... तुम... तुम्हें समझना होगा। ये... ये ज़रूरी है।"
"ज़रूरी? क्यों? ताकि... ताकि मैं अकेली रहूँ? ताकि... ताकि मैं भूल जाऊँ कि तुम कौन थे?"
"Meera... तुम... तुम ज़िंदा रहोगी। बस।"
"ज़िंदा? बिना तुम्हारे? ये... ये ज़िंदगी नहीं है।"
"Meera..."
"नहीं। मैं... मैं नहीं मानती। तुम... तुम अकेले decide नहीं कर सकते।"
"तो... तो क्या करेंगे?"
"पता नहीं। लेकिन... लेकिन हम... हम साथ में decide करेंगे।"
"कैसे?"
"पता नहीं। लेकिन... अभी नहीं। पहले... पहले Kapoor को ढूंढो। शायद... शायद उसके पास कोई जवाब हो।"
"ठीक है।"
"और... Aarav?"
"हम्म?"
"अगर... अगर तुमने अकेले decide किया... तो मैं... मैं तुम्हें माफ़ नहीं करूँगी।"
Aarav ने Meera को देखा। उसकी आँखों में... गुस्सा था। और... प्यार।
"ठीक है। हम साथ में।"
"हाँ। साथ में।"
रात 9 बजे। Aarav ने डायरी खोली:
"The Argument — Who Sacrifices?
- Aarav wants to seal alone
- Meera refuses to let him
- Both connected to Room 0
- Both willing to sacrifice
- Neither willing to let the other
- Decision: Find Kapoor first
- If no alternative: Both seal together
Naina's Diary:
- She saw Aarav in Room 0
- She learned he was replacement
- She sacrificed herself to save him
- She doesn't want Aarav to seal
- She wants him to live
Status: CRITICAL
- Mass confusion outside
- People entering Room 0
- Hospital barely functioning
- Kapoor still missing
- Must find alternative
Next: Find Kapoor
Goal: Seal Room 0 without losing anyone"
उसने डायरी बंद की।
Argument हो गया था। दोनों ने अपनी-अपनी बात रखी।
लेकिन... कोई जवाब नहीं मिला।
अब... अब Kapoor को ढूंढना था।
शायद... शायद उसके पास कोई रास्ता हो।
शायद।
अगर नहीं...
तो... दोनों साथ में।
Aarav ने Meera को देखा।
Meera ने Aarav को।
दोनों ने एक-दूसरे को देखा। बिना कुछ बोले।
और... फिर चुप हो गए।
Room 0 बाहर खुला था। और... कोई तो करेगा।
शायद।
जल्दी ही।
बहुत जल्दी।
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