Chapter 2: The Corridor
अगली शाम।
आरव ने पूरे दिन सोचा उस CCTV footage के बारे में। कोरिडोर। दरवाज़ा। "0"। 47 सेकंड। 9 मिनट का फर्क।
शाम की शिफ्ट शुरू होने से पहले वो अस्पताल आ गया। सीधा Room 47 के पास गया। वहीं जहाँ स्क्रीन पर वो कोरिडोर दिखा था।
दीवार थी। बस दीवार।
आरव ने हाथ रखा — वही ठंडक थी। लेकिन इस बार उसने कुछ और किया। उसने मोबाइल में टेप माप ऐप खोला और दीवार की चौड़ाई नापी।
4.2 feet।
फिर उसने Room 46 और Room 48 के बीच की दीवार नापी। 4.2 feet। बिल्कुल same।
लेकिन CCTV footage में जो कोरिडोर दिखा था — अगर वो सच में होता — तो उस दीवार की जगह एक खुला रास्ता होना चाहिए।
आरव ने दीवार पर मुक्का मारा।
ठोस थी। ईंट और सीमेंट। कोई खोखलापन नहीं। कोई छिपा दरवाज़ा नहीं।
"क्या कर रहे हो?"
आरव चौंका। पीछे मुड़ा।
डॉ. मीरा सेठी खड़ी थी। Forensic Pathology की रेज़िडेंट। उम्र 28। सफ़ेद कोट, बाल बंधे हुए, हाथ में leather notebook। चेहरा serious। आँखों में वो चमक थी जो अक्सर लोगों में तब होती है जब उन्हें कोई puzzle मिला हो।
"कुछ नहीं," आरव ने कहा। "बस... दीवार देख रहा था।"
"दीवार?" मीरा ने eyebrow उठाई। "रात की शिफ्ट से एक घंटा पहले आकर दीवार देख रहे हो?"
"तुम भी तो जल्दी आई हो।"
"मैं हमेशा जल्दी आती हूँ।" मीरा ने notebook खोली। "वैसे, मैं तुमसे बात करने आई थी। कल रात जो मरीज़ मरा — Room 47 वाला — मैंने autopsy की।"
"Autopsy? इतनी जल्दी?"
"Protocol है। अनएक्सप्लेंड डेथ।" मीरा ने notebook में कुछ देखा। "कुछ अजीब मिला।"
"क्या?"
"Body temperature। Official time of death 2:47 AM था। लेकिन liver temperature उस समय का नहीं था।"
"मतलब?"
"मतलब body उस समय उतनी गर्म नहीं होनी चाहिए थी जितनी थी। जैसे... जैसे body 9 minutes और जीवित रही official time के बाद।"
आरव की रीढ़ में सनसनी दौड़ गई। 9 minutes। वही 9 minutes जो CCTV footage और उसकी घड़ी में थे।
"शायद measurement error हो," आरव ने कहा। उसकी आवाज़ में वो confidence नहीं था जो उसे होना चाहिए था।
"Measurement error तीन बार होता है?" मीरा ने notebook पलटी। "पिछले 2 साल में Emergency Wing में 3 unexplained deaths हुई हैं। तीनों में वही pattern है — 9 मिनट का फर्क।"
"तीन?"
"तीन।" मीरा ने notebook बंद किया। "मैं ये track कर रही हूँ। कोई और ध्यान नहीं देता। डॉ. कपूर साहब कहते हैं 'normal variation है।' Brijesh कहता है 'records मत खराब करो।' लेकिन मैं जानती हूँ कि ये normal नहीं है।"
आरव ने मीरा को देखा। उसकी आँखों में determination था। और कुछ — शायद डर। लेकिन वो डर उसे रोक नहीं रहा था। बल्कि आगे बढ़ा रहा था।
"तुम्हें क्या लगता है?" आरव ने पूछा।
"मुझे नहीं पता। लेकिन एक चीज़ ज़रूर पता है — ये hospital कुछ छिपा रहा है।"
दोनों खामोश हो गए। कोरिडोर में फ्लोरोसेंट लाइट की Buzzing आवाज़ थी। दूर से किसी मरीज़ की खाँसी। और कुछ नहीं।
"वैसे," मीरा ने कहा, "तुम्हारा नाम आरव है ना? Dr. Malhotra?"
"हाँ।"
"मैं Meera।" उसने हाथ आगे बढ़ाया। आरव ने हाथ मिलाया।
"और एक बात," मीरा ने कहा। "तुम अगर CCTV footage देख रहे थे तो... क्या देखा? तुम्हें भी कुछ अजीब लगा?"
आरव ने सोचा। क्या बताए? कि एक ऐसा कोरिडोर दिखा जो exist नहीं करता? एक दरवाज़ा जिस पर "0" लिखा था?
"नहीं," उसने कहा। "सब नॉर्मल था।"
मीरा ने उसकी आँखों में देखा। एक सेकंड। दो सेकंड।
"झूठ बोल रहे हो," उसने कहा। आवाज़ में कोई गुस्सा नहीं था। बस observation।
फिर वो मुड़ी और चली गई। कोरिडोर में उसके कदमों की आवाज़ गूँजती रही।
आरव अकेला खड़ा रहा। दीवार के सामने। उस जगह पर जहाँ CCTV पर कुछ दिखा था। जो शायद अभी भी वहाँ था।
बस दिख नहीं रहा था।
अभी तक नहीं।
Login to comment.