Chapter 14: Dr. Verma's Files
पुराना wing बंद था। लेकिन बंद होने का मतलब ये नहीं था कि अंदर कुछ नहीं था।
आरव रात 2 बजे hospital पहुँचा। कमला आंटी की चाबी उसकी जेब में थी। पुराने wing का दरवाज़ा — एक भारी लोहे का — जंग लगा हुआ था। चाबी घुमाई तो दरवाज़ा खुला।
अंदर अंधेरा था। गहरा, घना अंधेरा। टॉर्च जलाई तो रोशनी ने एक पुरानी दुनिया खोली — दीवारों पर पपड़ी उखड़ी हुई, फर्श पर धूल की मोटी परत, और छत से लटकते पुराने पंखे जो जंग से खाए हुए थे।
पुराना wing — जहाँ 1978 से कोई नहीं आया था।
आरव ने धीरे-धीरे चलना शुरू किया। corridor संकरा था, दोनों तरफ दरवाज़े बंद थे। कुछ पर नामप्लेट अभी भी लगी थीं — "Dr. Verma", "Dr. Sharma", "Dr. Gupta"।
डॉ. वर्मा का office आखिरी में था। दरवाज़ा खुला था — अंदर कोई ताला नहीं था।
आरव अंदर गया।
कमरा छोटा था। एक desk, एक कुर्सी, एक अलमारी, और दीवार पर एक पुराना calendar — 1978 का। Desk पर कागज़ों का ढेर था — सब धूल से ढके। अलमारी के शीशे पर मकड़ियों के जाले थे।
आरव ने desk साफ की और कागज़ों को देखने लगा।
पहला कागज़ — डॉ. वर्मा का हाथ से लिखा नोट। "Room 0 — एक boundary। जहाँ दो realities मिलती हैं।"
दूसरा — एक diagram। Hospital का floor plan, लेकिन उसमें एक और corridor बना हुआ था — Room 99 के बाद, जो official floor plan में मौजूद नहीं था।
तीसरा — एक लिस्ट। नाम, तारीख़ें, नोट्स।
"1972 — रामलाल, 60 साल। Room 0 देखा। मृत्यु 2 दिन बाद।"
"1974 — सुशीला, 45 साल। Room 0 देखा। मृत्यु 1 हफ्ता बाद।"
"1976 — विक्रम, 52 साल। Room 0 देखा। मृत्यु 3 दिन बाद।"
आरव ने लिस्ट गिनी — 15 नाम। 1970 से 1978 तक। सबने Room 0 देखा। और सबकी मृत्यु हो गई।
"1978 — डॉ. आनंद वर्मा। Room 0 में permanent प्रवेश।"
आरव की उंगलियाँ काँप रही थीं।
अलमारी खोली। अंदर और कागज़ थे — और ज़्यादा detail में। डॉ. वर्मा ने Room 0 पर बरसों research की थी। उसने हर चीज़ लिखी थी — कैसे दिखता है, क्या करता है, क्यों आता है।
एक पन्ने पर लिखा था:
"Room 0 एक boundary है। ये मौत और ज़िन्दगी के बीच की जगह है। जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो Room 0 उसकी जगह 'replacement' तैयार करता है। ये replacement कोई दूसरा व्यक्ति नहीं है — ये एक 'version' है जो उस ज़िन्दगी को जीता है जो मरने वाले ने जीना चाहा था।"
"Room 0 बुरा नहीं है। ये बस... पूरा करता है। जो अधूरा रह गया, उसे खत्म करता है।"
आरव ने एक और पन्ना पढ़ा:
"लेकिन replacement की कीमत है। मरने वाले व्यक्ति की यादें — उसकी पहचान — वो धीरे-धीरे मिट जाती है। दुनिया बदल जाती है। फोटो नहीं बदलतीं, documents नहीं बदलते — लेकिन लोगों की ज़िन्दगी बदल जाती है। जैसे कोई thread खींच दे और पूरा कपड़ा बदल जाए।"
आरव ने वो कागज़ रखा और अगला उठाया।
"Room 0 का door हमेशा उसी जगह नहीं खुलता जहाँ से प्रवेश किया गया था। ये एक rule है जो मैंने खुद verify किया है। जब तुम Room 0 से बाहर निकलते हो, तो door कहीं और खुल सकता है — hospital के किसी भी हिस्से में।"
"लेकिन सबसे खतरनाक rule ये है — Room 0 में सुनी गई किसी मृत व्यक्ति की आवाज़ को दोहराना। अगर तुमने Room 0 में किसी मृत व्यक्ति की आवाज़ सुनी और उसे बाहर दोहराया... तो Room 0 तुम्हें फिर से बुलाएगा। और इस बार... तुम वापस नहीं आओगे।"
आरव ने कागज़ रखा। उसके शरीर पर पसीना आ गया।
अलमारी के सबसे नीचे एक और चीज़ थी — एक audio cassette। पुरानी, जंग लगी। उस पर एक लेबल चिपका था: "Dr. Verma — Room 0 Research — Oct 1978।"
आरव ने cassette उठाई। उसके पास cassette player नहीं था। लेकिन कमला आंटी ने कहा था — डॉ. वर्मा की recording कहीं बची हो सकती है।
शायद यही वो recording है।
उसने cassette अपनी जेब में रखी और बाहर आने लगा।
तभी उसे कुछ सुनाई दिया।
एक आवाज़। धीमी, फुसफुसाती हुई। जैसे कोई कमरे के अंदर से बोल रहा हो।
"आरव..."
उसका नाम।
कोई उसका नाम बुला रहा था।
पुराने wing में। अंधेरे में। जहाँ 1978 से कोई नहीं आया था।
आरव ने टॉर्च घुमाई। corridor खाली था। कोई नहीं था।
लेकिन आवाज़ फिर आई —
"आरव... अंदर आओ..."
उसका दिल ज़ोर से धड़का। वो भागा। तेज़-तेज़ भागा। corridor से, दरवाज़े से, बाहर। रात की हवा ने उसके चेहरे को छुआ।
वो रुका। हाँफते हुए। काँपते हुए।
उसकी जेब में cassette थी। और उसके दिमाग़ में वो आवाज़।
"आरव... अंदर आओ..."
Rule 8। Room 0 में सुनी गई किसी मृत व्यक्ति की आवाज़ को दोहराना खतरनाक है।
लेकिन आरव ने उसे दोहराया नहीं था। बस सुना था।
क्या इतना काफ़ी था?
बीप ————–
आरव ने रात 4 बजे तक cassette सुनने की कोशिश की। लेकिन player कहीं नहीं था। उसने सोचा — कल मीरा के पास जाऊँगा। उसके lab में equipment होगा।
लेकिन उसके दिमाग़ में एक ही बात घूम रही थी —
डॉ. वर्मा ने लिखा था: "मैं Room 0 में permanent जा रहा हूँ। मेरे पीछे मत आना।"
और फिर — वो चला गया। और वापस नहीं आया।
शायद Room 0 ने उसे भी बुलाया था।
जैसे उसने आरव को बुलाया।
"आरव... अंदर आओ..."
शायद Room 0 हर किसी को बुलाता है।
शायद ये उसका तरीका है।
शायद ये उसका जाल है।
4:28 AM
आरव ने खिड़की से बाहर देखा। अस्पताल दूर खड़ा था। पुराना wing अंधेरे में डूबा हुआ था।
उसने सोचा — कल वो cassette लेकर मीरा के पास जाएगा। और फिर... देखेगा।
शायद डॉ. वर्मा ने कुछ ऐसा रिकॉर्ड किया हो जो इस सब का जवाब दे।
या शायद... जो इससे भी ज़्यादा डरावना हो।
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