Chapter 12: Kamla Aunty
कमला देवी का घर hospital से दस मिनट की दूरी पर था — एक पुरानी कॉलोनी में, जहाँ पेड़ इतने बड़े हो गए थे कि छतों को छू रहे थे। आरव ने पता ढूंढा और एक पुराने से घर के सामने खड़ा हो गया। दरवाज़ा खुला था।
अंदर एक बुज़ुर्ग औरत बैठी थी — छोटी सी, सफ़ेद बालों वाली, आँखों में वो चमक जो सिर्फ उन लोगों में होती है जिन्होंने बहुत कुछ देखा हो। वो अपनी वेरंडा की कुर्सी पर बैठी थी और चाय पी रही थी।
"आप कमला आंटी हैं?" आरव ने पूछा।
"हाँ। और तुम कौन हो?"
"डॉ. आरव मल्होत्रा। Emergency Wing में।"
कमला आंटी ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा। "तुम उस wing से आए हो? वहीं जहाँ...?" उन्होंने बात अधूरी छोड़ दी।
"जी। मैं Room 0 के बारे में जानना चाहता हूँ।"
चाय का प्याला रुक गया। कमला आंटी की आँखें संकरी हो गईं। कुछ पल चुप रहीं। फिर बोलीं —
"अंदर आओ।"
अंदर एक छोटा सा बैठक का कमरा था। दीवारों पर पुरानी तस्वीरें — शादियाँ, बच्चे, festival के मौके। एक कोने में टेलीविज़न बंद पड़ा था। खिड़की से रोशनी आ रही थी।
कमला आंटी ने कुर्सी पर बैठते हुए कहा — "बहुत कम लोग अब इस बारे में पूछते हैं। पिछले पाँच साल से तो कोई नहीं आया।"
"आप जानती हैं Room 0 के बारे में?"
"जानती हूँ?" कमला आंटी ने हँसी — एक कड़वी सी हँसी। "मैं वहाँ गई हूँ। 1998 में।"
आरव का दिल ज़ोर से धड़का।
"उस रात मैं नाइट ड्यूटी पर थी," कमला आंटी ने कहना शुरू किया। "रात को 2 बजे के करीब मुझे लगा कि corridor बदल गया है। दीवारें... जैसे खिसक गईं। और वो corridor जो हमेशा Room 99 पर खत्म होता था — वो अब आगे जा रहा था।"
"और उसके अंत में?"
"एक दरवाज़ा। '0' लिखा था उस पर।"
कमला आंटी ने अपनी चाय का प्याला रख दिया। उनके हाथ काँप रहे थे।
"मैं अंदर गई। मैंने सोचा — शायद कोई patient है। शायद मुझे मदद करनी चाहिए।"
"और अंदर क्या था?"
"एक कमरा। बिल्कुल साधारण। एक बेड। एक monitor। और एक chart।"
"Chart पर क्या लिखा था?"
"'Replacement confirmed.'"
आरव ने गहरी साँस ली। वही लाइन। वही chart।
"उस बेड पर एक औरत लेटी थी। बूढ़ी। उसकी आँखें बंद थीं। मैंने सोचा — शायद सो रही है। मैंने उसका pulse चेक किया।"
"और?"
"pulse था। लेकिन बहुत धीमा। जैसे... जैसे ज़िन्दगी और मौत के बीच कहीं अटकी हो।"
कमला आंटी ने अपनी आँखें बंद कीं।
"मैंने उसे देखा। और तभी मुझे याद आया — आज मेरी बेटी का जन्मदिन है।"
"जन्मदिन?"
"हाँ। वो 12 साल की हो रही थी। मैंने सुबह उसे केक दिलाने का वादा किया था। लेकिन मैं duty पर थी। मैंने सोचा — शाम को मना लेंगे।"
कमला आंटी की आवाज़ टूट गई।
"जब मैं Room 0 से बाहर आई... तो मुझे अपनी बेटी का जन्मदिन याद नहीं था।"
"क्या?"
"मुझे पता था कि मेरी बेटी है। मुझे पता था कि उसका नाम है। लेकिन मुझे याद नहीं था कि आज उसका जन्मदिन है। मैं शाम को घर गई, बेटी रो रही थी, पति गुस्से में थे। और मैं... मैं समझ नहीं पा रही थी कि वो क्यों रो रही है।"
आरव चुप था।
"बाद में याद आया। धीरे-धीरे। जैसे कोई पर्दा हट रहा हो। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मेरी बेटी को लगा कि मैंने उसका जन्मदिन भूल गई। मैंने भूला नहीं था — Room 0 ने छीन लिया था।"
"Rule 7," आरव ने फुसफुसाया।
"क्या?"
"कुछ नहीं। बस... एक pattern।"
कमला आंटी ने उसे देखा। "तुम्हें पता है ना कि Room 0 क्या करता है?"
"मुझे पूरा यकीन नहीं है।"
"Room 0 बुरा नहीं है," कमला आंटी ने कहा। "ये बस... पूरा करता है। जो शुरू होता है, उसे खत्म करता है। लेकिन इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।"
"कैसी कीमत?"
"यादें। छोटी-छोटी यादें। जो तुम्हारी ज़िन्दगी को बनाती हैं। Room 0 उन्हें ले लेता है। जैसे... जैसे कोई किताब के पन्ने फाड़ दे। कहानी तो वही है, लेकिन कुछ अधूरा सा लगता है।"
आरव ने सोचा — डॉ. राघव की फाइल के खाली पन्ने। शायद यही वजह थी।
"आंटी, एक और बात — डॉ. वर्मा। आप उन्हें जानती हैं?"
कमला आंटी का चेहरा बदल गया। कुछ पल के लिए — जैसे कोई पुराना ज़ख्म फिर से खुल गया हो।
"डॉ. वर्मा... हाँ। मैं उन्हें जानती थी। वो Room 0 पर research करते थे। बहुत अच्छे इंसान थे। बहुत होशियार।"
"उनके बारे में बताइए।"
"उन्होंने 1970 से 1978 तक Room 0 पर काम किया। उन्होंने हर कुछ लिखा। डायरी बनाई। Recording की। और फिर... एक दिन वो Room 0 में गए और वापस नहीं आए।"
"वापस नहीं आए?"
"उनकी चीज़ें गायब थीं। डायरी गायब थी। Recording गायब थी। बस एक चीज़ बची थी — उनकी table पर एक नोट। 'मैं Room 0 में permanent जा रहा हूँ। मेरे पीछे मत आना।'"
आरव को डॉ. राघव का आखिरी नोट याद आया। "मुझे सबको बताना होगा।" और फिर — खाली पन्ने।
"आंटी, डॉ. वर्मा की कोई recording बची है?"
"नहीं। सब गायब हो गया। लेकिन..." कमला आंटी रुकीं। "एक चीज़ बची है। डॉ. वर्मा का office — पुराने wing में। वो बंद है 2018 से। लेकिन अंदर उनकी desk है। शायद कुछ मिल जाए।"
उन्होंने एक चाबी निकाली और आरव की तरफ बढ़ाई।
"ये रखो। पुराने wing की चाबी। मैंने इसे 2010 में save किया था। कभी-कभी सोचती हूँ कि क्यों रखा। शायद... शायद इसीलिए।"
आरव ने चाबी ली। पुरानी तांबे की, जंग लगी हुई।
"एक और बात," कमला आंटी ने कहा। "Room 0 हर इंसान को याद रखता है जो अंदर जाता है। हर एक को। तुम्हें नहीं लगता कि ये डरावना है?"
"हाँ," आरव ने कहा। "बहुत डरावना है।"
"फिर भी जाओगे?"
आरव ने चाबी को अपनी जेब में रखा।
"हाँ।"
कमला आंटी ने मुस्कुराते हुए कहा — "तुम उस डॉ. वर्मा जैसे हो। बहुत होशियार। बहुत ज़िद्दी। और... बहुत अकेले।"
आरव जब घर लौटा तो उसकी जेब में एक चाबी थी। और दिमाग़ में सैकड़ों सवाल।
पुराना wing। डॉ. वर्मा का office।
शायद वहाँ कुछ मिले।
शायद वो कुछ ऐसा खोजे जो उसकी ज़िन्दगी बदल दे।
या शायद... जो उसे खत्म कर दे।
4:12 AM
आरव ने खिड़की से बाहर देखा। रात गहरी थी। अस्पताल की इमारत अंधेरे में डूबी हुई थी — सिर्फ Emergency Wing की लाइटें जल रही थीं।
उसने सोचा — कमला आंटी ने कहा था Room 0 बुरा नहीं है। बस पूरा करता है।
लेकिन क्या पूरा करता है?
और किसकी कीमत पर?
वो सो नहीं पाया।
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