Chapter 3: White Coats
मीरा सेठी के लिए ये hospital एक puzzle था।
दो साल हो गए थे उसे यहाँ आए। Forensic Pathology — मरे हुओं की भाषा पढ़ना। वो उसमें expert थी। लेकिन इस hospital की भाषा वो अभी तक नहीं समझ पाई थी।
सुबह का वक़्त। Canteen में भीड़ थी। नर्सें, वार्ड बॉय, डॉक्टर — सब अपनी-अपनी चाय में डूबे हुए। मीरा corner table पर बैठी थी। सामने notebook खुला।
पहला page: "9 मिनट।" बार-बार लिखा। अलग-अलग रंग की ink में।
"Hey, Meera!"
मीरा ने ऊपर देखा। डॉ. समीर जोशी खड़ा था। Surgery resident। उम्र 31। gym-going, muscular, confident smile। हमेशा phone हाथ में। हमेशा।
"तुम यहाँ?" समीर ने पूछा। उसकी नज़र notebook पर गई। "क्या लिख रही हो?"
"कुछ नहीं।"
"कुछ नहीं में इतनी concentrate करती हो?" समीर ने chair खींची और बैठ गया। "वैसे, लंच का plan है? बाहर एक नया restaurant खुला है—"
"नहीं।"
"लेकिन मैंने कुछ बोला भी नहीं।"
"तुम्हारी आँखें बोल रही थीं।" मीरा ने notebook बंद किया। "समीर, मैं busy हूँ।"
समीर ने हाथ उठाया। "Okay, okay। बाद में बात करते हैं।" वो उठा और चला गया। लेकिन जाते-जाते एक बार और notebook की तरफ देखा।
मीरा ने ध्यान नहीं दिया।
फिर एक और आवाज़ आई।
"चाय लोगी?"
नर्स प्रिया। Short hair, eyeliner, wrist पर tattoo। उसके हाथ में दो कप थे।
"एक मेरे लिए रख लो," प्रिया ने कहा और बैठ गई। "तुम सुबह-सुबह यहाँ होती हो। मुझे लगता है तुम्हें नींद नहीं आती।"
"आती है। बस कम।"
"कम नींद, ज़्यादा काम।" प्रिया ने चाय sip की। "वैसे, कल रात जो हुआ — Room 47 वाला — तुमने सुना?"
"हाँ। Autopsy की।"
"कुछ मिला?"
मीरा ने प्रिया को देखा। प्रिया को trust करना मुश्किल था। वो जानती बहुत थी — लेकिन क्या बताती थी और क्या छिपाती थी, ये हमेशा clear नहीं होता था।
"Body temperature mismatch था," मीरा ने कहा। "9 minutes का फर्क।"
प्रिया का चेहरा बदला। बस एक सेकंड के लिए। फिर normal हो गया।
"Normal variation होगा," प्रिया ने कहा। लेकिन उसकी आवाज़ में weight था।
"Normal variation 3 बार नहीं होता," मीरा ने कहा। "पिछले 2 साल में 3 cases। सब Emergency Wing में। सब में 9 मिनट का फर्क।"
प्रिया ने चाय का cup नीचे रखा। उसकी नज़र कोरिडोर की तरफ गई — Room 47 की तरफ।
"Meera," उसने धीरे से कहा। "ये मामला छोड़ दो।"
"क्यों?"
"क्योंकि कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिनका जवाब तुम्हें नहीं चाहिए।"
मीरा ने प्रिया की आँखों में देखा। वहाँ fear था। असली fear। वो type नहीं जो फिल्मों में दिखता है — चिल्लाना, भागना। ये वो fear था जो इंसान को खामोश कर देता है।
"तुम कुछ जानती हो," मीरा ने कहा। Statement, not question।
प्रिया कुछ बोलती उससे पहले canteen का PA system बजा।
"Dr. Meera Sethi, Forensic Lab। Dr. Meera Sethi, Forensic Lab।"
मीरा उठी। जाते-जाते प्रिया की तरफ देखा।
"हमारी बात अधूरी है।"
प्रिया ने कोई जवाब नहीं दिया। बस अपनी चाय की तरफ देखती रही।
मीरा Forensic Lab पहुँची। मेज़ पर बैठी। Notebook खोला।
पहले page पर लिखा था: "9 मिनट।"
दूसरे page पर: "3 cases। 2 years। सब Emergency Wing में।"
तीसरे page पर: "कौन जानता है? प्रिया जानती है। डॉ. कपूर जानते हैं (वो हर बार dismiss करते हैं — इसका मतलब वो जानते हैं)। Brijesh जानता है (वो records रोकता है — इसका मतलब वो जानता है)।"
चौथे page पर: "नया डॉक्टर — आरव मल्होत्रा। उसने भी कुछ देखा। लेकिन बोला नहीं।"
मीरा ने pen cap लगाया। Notebook बंद किया।
ये hospital कुछ छिपा रहा था। और मीरा उस चीज़ को ढूँढ निकालेगी। चाहे कुछ भी हो जाए।
क्योंकि मरे हुओं की भाषा पढ़ना उसका काम था। और इस hospital में मरे हुए बहुत थे।
लेकिन कुछ ऐसे भी थे जो मरे नहीं थे।
बस... गायब हो गए थे।
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