Chapter 6: The Childhood Name
आरव ने उस रात सोने की कोशिश की। On-call room में लेटा। आँखें बंद। लेकिन हर बार आँखें बंद करता — मरीज़ का चेहरा दिखता। वो ठंडी उंगलियाँ। वो आवाज़:
"तेरी जगह कोई और होनी चाहिए थी।"
"Death pending।"
"तू गायब हो जाएगा। जैसे कभी था ही नहीं।"
सुबह हो गई। आरव उठा। आईने में देखा — वही चेहरा था। वही थकी आँखें। वही silver watch कलाई पर।
वो अभी भी यहाँ था।
"शायद सपना था," उसने खुद से कहा। "बहुत realistic सपना। बस।"
लेकिन वो जानता था कि सपना नहीं था। क्योंकि सपने में ठंडक नहीं होती। और उसकी कलाई पर अभी भी ठंडक थी।
सुबह की शिफ्ट में आरव ने काम किया। मरीज़ देखे। Prescriptions लिखे। लेकिन उसका दिमाग Room 0 में था।
दोपहर को उसने हिम्मत की।
सीधा CCTV रूम गया। कल रात का footage देखा।
1:23 AM — कोरिडोर नॉर्मल।
1:24 AM — कोरिडोर नॉर्मल।
1:25 AM — कोरिडोर बदला। वही एक्स्ट्रा कोरिडोर। वही दरवाज़ा। "0"।
1:32 AM — कोरिडोर नॉर्मल हो गया।
7 मिनट।
लेकिन आरव ने Room 0 में 9 मिनट बिताए थे। Clock भी 9 मिनट slow था। तो 7 मिनट या 9 मिनट — फर्क क्या था?
"शायद camera ने capture नहीं किया पूरा," आरव ने सोचा।
फिर उसने कुछ और देखा।
Footage में — जब कोरिडोर बदला — उसमें आरव दिख रहा था। वो खड़ा था। Room 47 के पास। दीवार देख रहा था।
फिर वो आगे बढ़ा। एक्स्ट्रा कोरिडोर में गया।
लेकिन कैमरे में सिर्फ उसकी पीठ दिख रही थी। चेहरा नहीं।
और जब वो Room 0 में गया — कैमरे में कुछ नहीं दिखा।
सिर्फ खाली कोरिडोर।
जैसे आरव गायब हो गया हो।
आरव ने footage बंद किया।
उसे किसी से बात करनी थी। लेकिन किससे? मीरा से — वो तो खुद investigate कर रही थी। लेकिन क्या वो यकीन करेगी? Dr. Kapoor से — लेकिन वो तो सब dismiss कर देते हैं।
आरव ने फैसला किया — Dr. Kapoor से बात करेगा। कम से कम वो senior हैं। शायद कुछ बता सकते हैं।
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