Chapter 21: Raju
रजू सुबह 7 बजे hospital पहुँच जाता था। हमेशा। बिना miss किए।
आज भी वो वैसे ही आया — कमीज़ की जेब में एक पेंसिल, कान पर मोबाइल फोन, और चेहरे पर वही मुस्कान जो हमेशा रहती थी।
"भैया, सफ़ाई हो गई। Ward 4 से 12 तक।"
Priya ने सिर हिलाया। "अच्छा रजू। अब supply room साफ कर दो।"
"जी दीदी। Pinky को 4 बजे school से लाना है। जल्दी करता हूँ।"
रजू हमेशा Pinky का नाम लेता था। उसकी बेटी। 10 साल। कक्षा 5। रजू की दुनिया सिर्फ दो चीज़ों से बनी थी — hospital और Pinky।
आरव उसे कई बार देख चुका था। रजू वो इंसान था जिसे कोई notice नहीं करता — जो बिना शिकायत के काम करता, जो हमेशा मुस्कुराता, जो कभी किसी से झगड़ा नहीं करता। बस एक साधारण आदमी जो अपनी बेटी के लिए जी रहा था।
दोपहर 1 बजे। Emergency Wing store room।
रजू supply shelf लगा रहा था। ऊपर की shelf भारी थी — पुरानी metal की, जंग लगी हुई। उसने एक box ऊपर रखा। फिर दूसरा।
"रजू, ध्यान से," Priya ने कहा जब वो गुज़र रही थी।
"कोई बात नहीं दीदी। मैं रोज़ लगाता हूँ।"
लेकिन आज shelf अलग थी। आज वो हिल रही थी। जैसे उसका base कमज़ोर हो गया हो। रजू ने notice नहीं किया।
उसने आखिरी box ऊपर रखा। और तभी —
एक ज़ोर की आवाज़। धातु के टकराने की।
Shelf गिरी।
ऊपर की सारी चीज़ें — boxes, bottles, equipment — सब नीचे आ गिरे। और साथ में — shelf खुद। भारी metal shelf रजू के सिर पर गिरी।
आरव ने आवाज़ सुनी। भागकर आया।
रजू ज़मीन पर पड़ा था। खून। बहुत खून। shelf उसके सिर और कंधे पर थी। उसकी आँखें खुली थीं — लेकिन कुछ नहीं देख रही थीं।
"रजू!" आरव चिल्लाया। वो दौड़ा, shelf हटाई। लेकिन बहुत देर हो चुकी थी।
रजू का सिर बुरी तरह टूटा हुआ था। Brain hemorrhage। कोई मौका नहीं था।
"Code Blue! Store room!" आरव ने walkie-talkie पर बोला।
लेकिन जब team आई, तो रजू जा चुका था।
आरव ने उसका pulse check किया। NULL। Heart rate: NULL।
"Time of death — 1:47 PM।"
Priya ने आँखें बंद कीं। Anjali रोने लगी।
रजू। सिर्फ 42 साल। एक बेटी जो उसका इंतज़ार कर रही थी।
आरव ने अपना फोन निकाला। रजू की photo थी — उसने कुछ दिन पहले खींची थी। रजू मुस्कुरा रहा था, कमीज़ की जेब में पेंसिल।
उसने photo को ज़ूम किया। रजू का चेहरा। उसकी आँखें। उसकी मुस्कान।
"तुम्हारी बेटी इंतज़ार कर रही है, रजू," आरव ने फुसफुसाया।
लेकिन अब कोई इंतज़ार नहीं था। अब सिर्फ... खालीपन था।
शाम को Aarav ने Hospital admin office जाकर Raju की death report file की। Brijesh ने बिना देखे sign कर दिया।
"ये ward boys... safety training नहीं लेते। Shelf लगाने का सही तरीका नहीं पता।"
Aarav ने उसे घूरा। लेकिन कुछ बोला नहीं।
रात 3 बजे। On-call room।
Aarav ने फोन खोला। रजू की photo अभी भी थी। उसने उसे देखा।
"Kal Pinky aaegi gate par," उसने सोचा। "Papa ka intezaar karegi."
और फिर एक और बात — जो उसके दिमाग़ में एक अंधेरा सा छा गई।
Room 0।
क्या Room 0 रजू के साथ भी वही करेगा जो बाकी के साथ करता है? क्या रजू की replacement होगी? क्या कल से कोई नहीं जानेगा कि रजू कौन था?
शायद। शायद नहीं।
लेकिन एक बात तय थी — कल सुबह Pinky gate पर होगी। और वो "papa" कहेगी।
क्या कोई सुनेगा?
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