Chapter 64: The Cost
Room 0 अंदर।
अंधेरा। सिर्फ एक रोशनी। और... दीवारों पर "0"।
Aarav और Meera खड़े थे। एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए।
"Room 0... Room 0 हमें दिखाएगा," Aarav ने कहा। "हमारी guilt।"
"मैं जानती हूँ।"
"Ready?"
"हाँ।"
और फिर — Room 0 ने अपना काम शुरू किया।
पहले — दीवारें बदलीं। Corridor बदला। और... एक कमरा दिखा।
एक hospital room। बेड पर एक लड़की थी। छोटी। बीमार। और उसके पास खड़ी थी — एक और लड़की। Meera।
"ये... ये मैं हूँ," Meera ने कहा। "पाँच साल पहले।"
Room 0 दिखा रहा था। Meera internship कर रही थी। Ward में। एक patient थी — बूढ़ी औरत। बीमार। मर रही थी।
"ये... ये वो patient है," Meera ने कहा। "जिसे मैंने नहीं बचाया।"
"क्या हुआ था?"
"वो... वो मर रही थी। उसका BP गिर रहा था। मैं... मैंने call किया। लेकिन... डॉक्टर नहीं आए। और... मैंने... मैंने कुछ नहीं किया।"
"क्यों नहीं किया?"
"मैं... मैं डर गई थी। अगर... अगर मैंने कुछ किया और वो मर गई... तो... तो मेरी गलती मानी जाती। इसलिए... इसलिए मैंने कुछ नहीं किया।"
"और... वो मर गई?"
"हाँ।"
"और... तुमने कभी accept नहीं किया?"
"नहीं। मैंने... मैंने खुद को justify किया। कहा कि... कि मैं student थी। कि... कि डॉक्टर का काम था। कि... कि मैं कुछ नहीं कर सकती थी।"
"लेकिन... तुम कर सकती थी?"
"हाँ। अगर... अगर मैंने try किया होता... शायद... शायद वो बच जाती।"
Room 0 ने और दिखाया।
वो बूढ़ी औरत मर गई। और... Meera वहाँ खड़ी थी। चुप। कुछ नहीं बोली।
"ये... ये मेरी guilt है," Meera ने कहा। "मैंने... मैंने उसे नहीं बचाया। और... मैंने कभी accept नहीं किया।"
"तो... अब accept करो।"
"कैसे?"
"बस... बोलो। कि... कि तुमने गलत किया। बिना justify किए। बिना excuse के।"
Meera ने गहरी साँस ली।
"मैंने... मैंने गलत किया। मैं... मैंने उसे नहीं बचाया। और... मैंने कभी accept नहीं किया। अब... अब मैं accept करती हूँ।"
Room 0 में कुछ बदला। रोशनी तेज़ हुई। और... वो बूढ़ी औरत का चेहरा... गायब हो गया।
"ये... ये क्या हुआ?"
"Guilt release हो गई।"
"तो... Room 0 seal हो गया?"
"नहीं। अभी नहीं। अभी... अभी तुम्हारी बारी है।"
Aarav ने देखा। Room 0 बदल रहा था।
अब — एक और कमरा दिखा।
एक छोटा लड़का। बीमार। बेड पर। और उसके पास — एक लड़की। Naina।
"ये... ये Naina है," Aarav ने कहा। "11 साल पहले।"
Room 0 दिखा रहा था। Naina hospital में थी। उसका दोस्त बीमार था। और... उसने Room 0 देखा।
"ये... ये वो रात है," Aarav ने कहा। "जब Naina मर गई।"
"हाँ।"
Room 0 ने दिखाया। Naina ने Room 0 में प्रवेश किया। अंदर — एक patient था। बेड पर। और उस patient का चेहरा... Aarav का था।
"ये... ये मैं हूँ?" Aarav ने कहा। "Room 0 में?"
"हाँ। Naina ने तुम्हें देखा। तुम मर रहे थे। और... उसने... उसने तुम्हें बचाने की कोशिश की।"
"लेकिन... मैं तो ज़िंदा हूँ।"
"तुम... तुम असली Aarav नहीं हो।"
"क्या?"
"तुम... तुम Room 0 की replacement हो। असली Aarav मर गया था। Room 0 ने तुम्हें replace किया। Naina ने... Naina ने तुम्हें बचाने की कोशिश की। लेकिन... उसकी कोशिश ने तुम्हें Room 0 से जोड़ दिया।"
Aarav ने देखा। Room 0 में — वो लड़का। उसका चेहरा। लेकिन... वो असली Aarav नहीं था।
"तो... तो मैं कौन हूँ?"
"तुम... तुम Room 0 की replacement हो। तुम्हारी पूरी ज़िंदगी — तुम्हारी यादें, तुम्हारे रिश्ते, सब कुछ — Room 0 ने patch किया है।"
"तो... तो मेरा कोई असली past नहीं है?"
"नहीं।"
Aarav काँप रहा था।
"और... Naina?"
"Naina ने तुम्हें बचाने की कोशिश की। लेकिन... उसकी कोशिश ने तुम्हें Room 0 से जोड़ दिया। और... उसकी कोशिश ने उसे मार डाला।"
"तो... तो Naina की मौत... मेरी वजह से?"
"हाँ।"
Aarav ने अपना चेहरा पकड़ लिया।
"तो... तो मेरी guilt... Naina की मौत?"
"हाँ।"
"और... अगर मैं Room 0 seal करूँ... तो..."
"तो तुम्हारी guilt release हो जाएगी। लेकिन... तुम भी गायब हो जाओगे।"
"क्यों?"
"क्योंकि... तुम Room 0 का हिस्सा हो। तुम्हारी existence Room 0 पर depend करती है। अगर Room 0 seal हो गया... तो तुम भी..."
"मैं भी गायब हो जाऊँगा?"
"हाँ।"
Aarav ने Meera को देखा।
"तो... तो दोनों में से किसी एक को seal करना होगा।"
"हाँ।"
"और... जो seal करेगा... वो गायब हो जाएगा।"
"हाँ।"
Meera ने Aarav को देखा।
"तो... तो हम दोनों में से किसी एक को..."
"हाँ।"
Room 0 में चुप्पी थी। अंधेरा था। और... दोनों खड़े थे।
"Meera..."
"हम्म?"
"मैं... मैं करूँगा।"
"क्या?"
"Seal। मैं करूँगा।"
"नहीं।"
"क्यों नहीं?"
"क्योंकि... मैं भी connected हूँ। मैं भी Room 0 का हिस्सा हूँ।"
"लेकिन... मेरी guilt बड़ी है। Naina... Naina मेरी वजह से मरी।"
"और... मैंने patient को नहीं बचाया। मेरी guilt भी बड़ी है।"
"Meera, तुम... तुम ज़िंदा रहो। मैं... मैं चला जाऊँगा।"
"नहीं।"
"क्यों नहीं?"
"क्योंकि... तुम... तुम जाओगे तो... मैं... मैं अकेली हो जाऊँगी।"
"Meera..."
"नहीं। मैं... मैं नहीं चाहती कि तुम जाओ।"
"लेकिन... कोई तो करेगा।"
"तो... तो हम साथ में करेंगे।"
"साथ में? कैसे?"
"पता नहीं। लेकिन... हम... हम दोनों seal करेंगे।"
"दोनों? लेकिन... तो दोनों गायब हो जाएँगे।"
"तो... तो हम दोनों गायब हो जाएँगे। साथ में।"
"Meera, ये... ये पागलपन है।"
"हाँ। लेकिन... और कोई रास्ता नहीं है।"
Aarav ने Meera को देखा। उसकी आँखों में... गुस्सा था। और... प्यार।
"Meera... तुम... तुम ज़िंदा रहो। मैं... मैं करूँगा।"
"नहीं।"
"Meera..."
"नहीं। मैं... मैं तुम्हें जाने नहीं दूँगी।"
"तो... तो क्या करेंगे?"
"पता नहीं। लेकिन... अभी नहीं। पहले... पहले बाहर चलो। सोचते हैं।"
"ठीक है।"
दोनों ने दरवाज़ा खोला। बाहर आए।
गुफा में — Kamla आंटी, Sameer, Priya।
"क्या हुआ? Room 0 seal हो गया?"
"नहीं। अभी नहीं।"
"क्यों?"
"क्योंकि... seal करने वाला... वो गायब हो जाएगा।"
"गायब? कैसे?"
"पूरी तरह। Exist ही नहीं करेगा। कभी नहीं किया।"
सब चुप हो गए।
"तो... तो कोई तो करेगा?"
"हाँ। लेकिन... अभी नहीं। पहले... पहले सोचते हैं।"
"क्या सोचेंगे?"
"कि... कि कोई दूसरा रास्ता है या नहीं।"
"है?"
"पता नहीं। लेकिन... ढूंढेंगे।"
रात 5 बजे। गुफा में।
पाँचों बैठे थे। चुप।
Room 0 बाहर खुला था। Mass confusion हो रहा था। और... ये लोग अंदर बैठे थे। सोच रहे थे।
"तो... अब क्या?" Sameer ने पूछा।
"अब... अब हमें... हमें एक काम करना होगा।"
"क्या?"
"Kapoor को ढूंढना होगा।"
"Kapoor? वो... वो तो..."
"हाँ। वो... वो Room 0 से connected है। शायद... शायद उसके पास कोई जवाब हो।"
"लेकिन... वो तो..."
"हाँ। लेकिन... शायद। शायद उसके पास कोई रास्ता हो।"
"ठीक है। तो... ढूंढो।"
"और... जब तक ढूंढते हैं... तब तक... Room 0 को seal मत करो।"
"क्यों?"
"क्योंकि... जब तक कोई दूसरा रास्ता नहीं मिलता... तब तक... seal करना... seal करना मतलब... किसी को खोना।"
"और... हम... हम किसी को नहीं खोना चाहते।"
"हाँ। बिल्कुल नहीं।"
Aarav ने Meera को देखा।
"Meera?"
"हम्म?"
"हम... हम ढूंढेंगे। कोई रास्ता मिलेगा।"
"हाँ। ज़रूर मिलेगा।"
"और... अगर नहीं मिला?"
"तो... तो हम... हम साथ में decide करेंगे।"
"ठीक है।"
"और... Aarav?"
"हम्म?"
"अगर... अगर कोई रास्ता नहीं मिला... तो... तो हम साथ में seal करेंगे। दोनों। एक साथ।"
"Meera... ये..."
"नहीं। ये... ये हमारा decision है। दोनों का।"
"ठीक है।"
"और... अगर... अगर तुमने अकेले decide किया... तो मैं... मैं तुम्हें माफ़ नहीं करूँगी।"
Aarav ने Meera को देखा। उसकी आँखों में... गुस्सा था। और... डर।
"ठीक है। हम साथ में।"
"हाँ। साथ में।"
रात 6 बजे। गुफा में।
Aarav ने डायरी खोली:
"The Cost — Detailed:
- Sealing Room 0 = complete erasure
- Not death. Not forgetting. Total non-existence.
- Sealer's existence erased from everyone's memory
- Photos, documents, everything changes
- Sealer never existed. Never born. Never lived.
- Both Aarav and Meera connected to Room 0
- Both eligible to seal
- Neither willing to let the other sacrifice
- Decision: Find alternative first
- If no alternative: Both seal together
Status: CRITICAL
- Mass confusion outside
- People entering Room 0
- Hospital barely functioning
- Kapoor missing
- Must find alternative
Next: Search for Kapoor, find alternative
Goal: Seal Room 0 without losing anyone"
उसने डायरी बंद की।
Cost साफ़ था। जो seal करेगा — वो गायब हो जाएगा। पूरी तरह।
और... दोनों में से किसी एक को करना होगा।
लेकिन... दोनों नहीं चाहते थे।
तो... अब ढूंढना था। कोई दूसरा रास्ता।
शायद।
अगर मिला।
तो...
अगर नहीं मिला...
तो... दोनों साथ में।
Aarav ने Meera को देखा।
Meera ने Aarav को।
दोनों ने एक-दूसरे को देखा। बिना कुछ बोले।
और... फिर चुप हो गए।
Room 0 बाहर खुला था। और... कोई तो करेगा।
शायद।
जल्दी ही।
बहुत जल्दी।
Login to comment.